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कई बार ग़लत साबित हुए ओपेनियन पोल

2017-12-16 |

 राजीव शुक्ल, प्रधान संपादक- राहुल गांधी की ताजपोशी से ठीक पहले सभी न्यूज़ चैनलों ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश का सर्वे और   रियल ओपेनियन पोल कर कांग्रेस को हरवा दिया। ये सर्वे राहुल की राह में रोड़े की तरह है। ये बात सभी जानते हैं कि इन दोनों राज्यों   में कांग्रेस की तबकी अध्यक्ष सोनिया गांधी की कोई भूमिका नहीं थी। सारा दारोमदार राहुल पर था। इससे पहले राहुल ने यूपी में भी   कमान संभाली थी। लेकिन वहां भी वो जीत का स्वाद नहीं चख पाए थे। यूपी का कड़वा अनुभव लेकर उन्होंने गुजरात में प्रयोग किया।   सवालों की झड़ी और हमलार तेवरों के साथ बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को बैकफुट पर ला दिया।

जीएसटी, नोटबंदी, बेरोज़गारी, अमित शाह के बेटे जय की अंधाधुंध कमाई, काला धन जैसे मुद्दे उछालकर बीजेपी को खूब तंग किया। बतोलेबाज़ और झूठ बोलनेवाले प्रधानमंत्री जैसा तमगा देकर राहुल ने परिपक्व राजनीति की समझ दिखाई। ये राहुल का ही असर था कि देश के प्रधानमंत्री को गुजरात में डेरा डंडा डाल देना पड़ा। बीजेपी वोट मांगती कम और सफाई देती ज़्यादा नज़र आई। चुनाव से दस दिन पहले तक राहुल काफी मज़बूत दिख रहे थे। उन्होंने बीजेपी को परेशान करनेवाले युवा पाटीदार और पिछड़े नेताओं जिग्नेश मेवाणी, अल्पेश ठाकोर और हार्दिक पटेल जैसे नेताओं को साधकर पिच मज़बूत कर लिया था। लेकिन 6 दिसंबर को बाबरी की शहादत को लेकर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और दूसरे दौर के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मणिशंकर अय्यर के नीच वाले बयान   ने चालाक राजनेता मोदी का माहौल बदलने का मौक़ा दे दिया। नीच को जाति और गुजरात के स्वाभिमान से जोड़कर मोदी ने गुजरातियों के भावनाओं को कुरेद दिया। लिहाज़ा सभी चैनल चिल्ला-चिल्लाकर कहने लगे कि बीजेपी की बंपर जीत होगी।लेकिन अगर कुछ राज्यों के चुनावों के एग्जिट पोल का विश्लेषण किया जाए तो ये बात साफ हो जाएगी कि हर बार ये सही साबित नहीं हुए हैं। बात करते हैं बिहार की। 2015 में बिहार विधानसभा के चुनावों के बाद जो भी एग्जिट पोल आए उन सब के मुताबिक बिहार में एन.डी.ए. की सरकार बन रही थी। लेकिन जब नतीजे आए तो सभी सर्वे झूठे साबित हुए। महागठबंधन ने 178 सीटों पर क़ब्जा जमाया जबकि एन.डी.ए. को केवल 58 सीटें ही मिलीं। दिल्ली में 2015 में हुए चुनावों में हालांकि सर्वे में आप की बढ़त दिखाई गई थी। लेकिन जो सही तस्वीर थी उसे भी एग्जिट पोल दिखाने में असफल रहे थे। सभी एग्जिट पोल में आप को औसतन 30 से 40 सीटें दी गई थीं। लेकिन आप ने विपक्ष का सूपड़ा साफ कर 70 में से 67 सीटें जीत कर सभी चुनावी सर्वे को झूठा साबित कर दिया था। विपक्षी कांग्रेस पार्टी का जहां सूपड़ा साफ हो गया था। वहीं मोदी लहर के बाद देश की राजधानी दिल्ली में बीजेपी ने जैसे-तैसे करके 3 सीटें जीत अपनी नाक बचाई थी।

एग्जिट पोल के नतीजे कांग्रेस के नए अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बुरी खबर की आहट लेकर आए हैं। महीनों की जी तोड़ मेहनत और सधे जातीय समीकरणों के बावजूद कांग्रेस एग्जिट पोल के मुताबिक हिमाचल में सत्ता गंवा रही है। जबकि गुजरात में भी उसकी सीटों में कोई खास इजाफा नहीं दिख रहा। अध्यक्ष के रूप में उनके नाम की घोषणा के एक सप्ताह बाद ही गुजरात और हिमाचल के विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे हैं। अगर एग्जिट पोल के नतीजे सच साबित हुए तो राहुल पर कई सवाल उठेंगे।

राजनीति के जानकारों का कहना है कि राहुल के पूरे राजनीतिक करियर में केवल और केवल हार ही हुई है। अब गुजरात और हिमाचल चुनाव में कांग्रेस का हारना सीधे तौर पर उनकी हार मानी जाएगी। आलोचक कहेंगे कि चाहे पार्टी और सर्वाधिकार राहुल को दे दो।  उनकी किस्मत में हार ही है। हालांकि सभी सर्वे में बीजेपी जीतती दिख रही ।है लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं के चेहरों पर न तो रौनक  दिख रही है और न ही किसी भी पदाधिकारी ने कोई आधिकारिक बयान दिया। इससे साफ है कि बीजेपी भी कहीं न कही नतीजों को लेकर असमंजस में है। अभी तक पी.एम. और राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान को तो छोड़िए। किसी प्रवक्ता तक ने इस पर साफ तौर से कुछ नहीं बोला है।

 


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