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मुझे लोग अच्छी एक्ट्रेस के तौर पर जानें- सोनाक्षी

2017-11-07 |

सोनाक्षी सिन्हा ने 2010 में प्रदर्शित ’दबंग’ के ज़रिए बॉलीवुड में कदम रखा। इसमें उन्होंने सलमान खान के अपोजिट अभिनय की जबर्दस्त जादूगरी दिखाई। लेकिन  उसके बाद  उनके कैरियर में  उस तरह की बात  फिर नजर नहीं आई। सोनाक्षी सिन्हा ने हाल ही में  फिल्म इंडस्ट्री में 7 साल पूरे किए हैं। लेकिन उनके खाते में ’लुटेरा’, ’बुलेट राजा’, ’एक्शन जैक्सन’, ’फोर्स 2’, ’तेवर’, ’अकीरा’, ’लिंगा’ और ’नूर’ जैसी असफल फिल्मों की संख्या ज्यादा, और हिट फिल्में कम है। सोनाक्षी की कामयाबी में सबसे बड़ी रूकावट उनकी घरेलू लड़की वाली इमेज को माना जाता रहा है। 03 नवंबर को सोनाक्षी की ’इत्तेफाक’ रिलीज हुई। इसमें वो सिद्धार्थ मल्होत्रा के अपोजिट है। अक्षय खन्ना भी, इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। इसे बी.आर.चोपड़ा के पोते अभय चोपड़ा ने निर्देशित किया हैं। ’इत्तेफाक’  1969 में आई राजेश खन्ना और नंदा की इसी नाम की फिल्म का रीमेक है। पेश है इंटरटेंटमेंट एडिटर रोमा शुक्ला के साथ सोनाक्षी से एक बातचीत के अंश:-

सवाल- आपकी पिछली फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। इत्तेफाकसे आपको कितनी उम्मीदें हैं ?

जवाब- मैं अपनी किसी भी फिल्म को लेकर इस तरह की संभावनाएं व्यक्त करने के पक्ष में नहीं हूं। बस इतना कह सकती हूं कि फिल्म अच्छी बनी है और आॅडियंस को अवश्य पसंद आयेगी। सवाल- शुरू शुरू में आप अपनी फिल्मों को लेकर, काफी दावे करती रही हैं। अब अचानक आपके अंदर इस तरह का परिवर्तन कैसे आया ?

जवाब- पहले मुझे लगता था कि, मेरी फिल्म अच्छी बनी है, तो में उसके बारे में दावे, कर दिया करती थी। लेकिन, अब मैं जान चुकी हूं कि फिल्म के अच्छा बनने से ही कुछ नहीं होता। उसके हिट या फ्लॉप होने के लिए और भी कई बातें होती हैं। इसलिए अब मैने दावे करना छोड़ दिया है।

सवाल- अपनी फिल्मों की नाकामी के लिए, आप खुद को कितना जिम्मेदार मानती हैं ?

जवाब- जिस फिल्म के साथ, मेरा नाम जुड़ा होता है, स्वाभाविक रूप से उसके न चलने पर मैं, जिम्मेदारी, से बच नहीं सकती। लेकिन मेरी व्यक्तिगत कोशिश यही होती है कि फिल्म बेशक न चले, लेकिन कम से कम मैं उसके लिए दोषी न कहलाऊं।

सवाल- आप को व्यक्तिगत रूप से किस तरह की फिल्में करने में अधिक दिलचस्पी है ?

जवाब- इस इंडस्ट्री में 7 साल बिता लेने के बाद, अब मैं फिल्मों की संख्या बढाने के चक्कर में न पड़कर, सिर्फ अच्छी फिल्में करना चाहती हूं। मेरी कोशिश है कि लोग मुझे अच्छी एक्ट्रेस के तौर पर पहचानें। मेरा फोकस अपने काम पर रहता है। मैं कम, लेकिन सिर्फ अच्छा करना चाहती हूं।

सवाल- हर बड़ी एक्ट्रेस खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरू कर चुकी है। क्या आपका इस तरह का कोई इरादा है?

जवाब- मैं पूरी तरह टेंशन फ्री रहते हुए एक्टिंग में बिजी रहना चाहती हूं। फिल्म प्रोडक्शन के लिए मेरे भाई हैं। जिस तरह की खबरें आ रही हैं, कि मैं अपने भाइयों के साथ साझेदारी में भी प्रोडक्शन हाउस शुरू कर रही हूं। इन खबरों में सच्चाई नहीं है। वो अपना काम करेंगे, मैं अपना काम कर रही हूं।

सवाल- भगवान पर कितना भरोसा है?

जवाब- मैं भगवान में उतना ही यकीन करती हूं, जितना दूसरे लोग करते हैं। उसे भगवान कह लीजिए या कोई चमत्कारिक शक्ति। आखिर उस शक्ति का हाथ ही तो हमारे सिर पर होता है, जिसकी वजह से हमें कामयाबी मिलती है, और हम आगे बढते हैं। खुशकिस्मती से मेरे साथ सब कुछ अच्छा हुआ है। इसलिए मैं भगवान को कुछ ज्यादा ही मानती हूं।

सवाल- आपके उस बयान पर काफी कंट्रोवर्सी हुई थी, जिसमें आपने कहा था कि इस इंडस्ट्री में कोई किसी का दोस्त नहीं होता, यहां सिर्फ मतलब की दोस्ती होती है। इस तरह के विचारों की कोई खास वजह ?

जवाब- मैने कभी इस तरह की बात नहीं की। पता नहीं यह कंट्रोवर्सी किस तरह, कहां से पैदा हुई। सच तो यह है कि, मैंने यहां पर, सात साल में कई दोस्त बनाए हैं। यह भी सच है कि एक्ट्रेसों के साथ मेरी ज्यादा नहीं जमती, क्योंकि उनमें जलन का भाव, जरूरत से कुछ ज्यादा होता है। सलमान और अक्षय जैसे, मेरे यहां काफी दोस्त हैं।

सवाल- आजकल औरतों की आजादी को लेकर भी इस इंडस्ट्री में बहस छिड़ी हुई है। इस बारे में क्या कहेंगी?

जवाब- औरतों की आजादी को लेकर हमेशा काफी बढ चढ कर बातें की जाती रही हैं। लेकिन उन पर अत्याचार हैं कि बढते ही जा रहे हैं। औरतें खुद ही अपने अधिकारों के लिए संगठित नहीं हैं। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण क्या होगा कि आज 70 साल बाद भी  हमें अपने हकों के लिए यूं ढिंढोरा पीटना पड़ रहा है।

 

 


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